सरसों की संपूर्ण खेती का संपूर्ण ज्ञान
सरसों की संपूर्ण खेती
भारत में सरसों की खेती कुछ राज्यों में अच्छी की जाती है जैसे राजस्थान हरियाणा, हरियाणा से सटा हुआ पंजाब ,उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश का कुछ क्षेत्र,इन प्रदेशों में सरसों की खेती होती है
सफेद और पीली सरसों का उत्पत्ति स्थान दक्षिणी यूरोप को माना जाता है वह भूरी सरसों चीन से भारत में लाई गई वही काली सरसों को दक्षिणी मध्य सागर क्षेत्र में स्थानिक माना जाता है
राजस्थान पूरे भारत में नंबर वन स्थान पर आता है
सरसों की बुवाई के लिए सबसे उत्तम समय सितंबर के पहले सप्ताह से लेकर अक्टूबर तक माना जाता है कुछ वैरायटी या नवंबर के पहले सप्ताह तक भी बोई जा सकती हैं
सरसों का Botanical नाम
सरसों (Mustard) के कई वनस्पतिक नाम है
जिनमें से आम ब्रैसिका जंसिया Brassica juncea भूरी/भारतीय सरसों, ब्रैसिका निग्रा Brassica nigraकाली सरसों, और सिनीपिस अल्बा Sinapis alba या ब्रैसिका हिर्टा Brassica hirta सफेद/पीली सरसों हैं , मुख्य रूप से जिस सरसों की खेती हमारे भारत में होती है, उसका नाम ब्रैसिका जंसिया Brassica juncea है,यह तिलहन और मसाले में प्रयोग होती है।

मिट्टी की तैयारी
सरसों की बुवाई के लिए बारीक और बुरी मिट्टी होनी चाहिए जिसे अच्छे से जोड़कर कल्टीवेटर या रोटावेटर से बारीक ओर भुरभुरी करनी चाहिए।
वैसे तो सरसों की बुवाई के समय बरसात के बाद नामी ही उपलब्ध होती है लेकिन कभी-कभी नमी कम हो होने के कारण पलावा करके भी बुवाई की जाती है
बुवाई का समय और तरीका: मध्य भारत में 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक वह उत्तर भारत में अक्टूबर के पहले सप्ताह से लेकर 25 अक्टूबर तक वह कुछ वैरायटी नवंबर के पहले सप्ताह तक बिजाई की जाती है सरसों की बुवाई 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई में होनी चाहिए
बीज की मात्रा
सरसों की खेती में बीज की मात्रा Central Arid Zone Research Ihttps://www.cazri.res.in/nstitute (CAZRI) के अनुसार 4 5 kg/हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती हैं।
सरसों की बुवाई का तरीका: आमतौर पर सरसों को बिखेर कर बोया जाता है लेकिन कहीं कहीं इस लाइन में बोया जाता है लाइन से लाइन की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर अथवा एक से डेढ़ फीट रखनी चाहिए।
Note: सरसों की सबसे अधिक उत्पादन देने वाली वैरायटी पायनियर 45S46 है
खाद व उर्वरक:-
खाद: गोबर की खाद को अच्छी तरह मिट्टी में मिलाकर सरसों की बुवाई के समय सल्फर के साथ यूरिया या डीएपी को खेत में लगाना चाहिए ।
बुवाई के समय खाद की डोज
पहली सिंचाई पर यूरिया व सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल बेहतर रहता है अगर खेत में जिंक की आवश्यकता हो तो यूरिया की डोज को आधा कर कर जिंक के साथ मिक्स करके सरसों में डालना चाहिए
सरसों के रोग व कीट और उनकी रोकथाम
बीज उपचार: सरसों की बिजाई से पहले सरसों के बीज को कीटनाशक में फफूंदी नाशक से उपचारित कर कर बोलना चाहिए इसमें नया तो बी को किसी तरह के कट कहते हैं और नहीं उन पर फफूंदी लगती है इससे जर्मिनेशन पर बहुत अच्छा फायदा मिलता है
खरपतवार नियंत्रण
सरसों में खरपतवार नियंत्रण के लिए दो मुख्य तरीके हैं: बुवाई के बाद और फसल उगने के बाद
बुवाई से पहले या 24-48 घंटे के अंदर पैंडीमेथलीन 30% EC (लगभग 1.32 लीटर प्रति एकड़) का छिड़काव किया जा सकता है। फसल उगने के बाद नियंत्रण के लिए, टॉपिक 200-220 ग्राम प्रति एकड़ जैसी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। किसी भी खरपतवारनाशक का उपयोग करने से पहले, खेत में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करें और हमेशा खरपतवारनाशक निर्माता के निर्देशों का पालन अवश्य करें
कीट नियंत्रण:- सरसों में वैसे तुम ज्यादा कोई रोग नहीं आते लेकिन कभी-कभी बीटल बाग जैसे कट आ जाते हैं उसके लिए folidal या क्लोरोपीरीफोस 1.5% पाउडर का प्रयोग करना चाहिए सरसों में एसिड एफिड भी फरवरी के माह में दिखाई देता है उसकी रोकथाम के लिए एमिडा या थायो का 1gm/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से एफिड जैसिड जिमें आम भाषा में अल भी कहते है की समस्या से निजात मिल जाती है
सरसों के पौधे पर जब फलियां बन जाए तो लिक्विड सल्फर का स्प्रे करने से पैदावार में बढ़ोतरी देखने को मिलती है
कटाई:- जब दाने 90 %95 %परसेंट पकाने की अवस्था हो उसे समय कटाई का सर्वोत्तम होता है।
सरसों के दोनों को पौधे से अलग करना: पहले के समय किस सरसों को अपने घर लाने के बाद इंटरनेट से पिटाई कर कर सरसों के दोनों को अलग करते थे लेकिन अब थ्रेसर के माध्यम से सरसों के दानों को पौधे से अलग किया जाता है ये तरीका आसान ओर कम खर्चीला है।